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विल्वपत्र का महात्म्यhttp://www.bestastroguru.com/articles/1373024279bilvpatra.jpg

भगवान् शिव के विल्वपत्र का महात्म्य- विल्व महादेवजी का स्वरूप है, और इसकी देवताओं ने भी बड़ी स्तुति की है। इसकी महिमा कठिनता से जानी जाती है। संसार में जितने भी पवित्र और प्रसिध्द तीर्थ हैं, वे सब विल्वमूल में ही निवास करते हैं, क्योंकि विल्वमूल में लिंग रुपी अवव्यम महादेव का वास रहता है, और जो पुण्यात्मा इसकी पूजा करता है, वह निश्चय ही भगवान शिव को प्राप्त होता है। ऐसे विल्वमूल में जो भगवान् शिव को जल चढता है, मानो वह सब तीर्थों में स्नान कर चूका और वह पृथ्वी में पवित्र है। जो मनुष्य विल्वमूल को गंध-पुष्पादि से पूजता है, वह शिवलोक को प्राप्त होता है। तथा उसे संतान और सुख की वृध्दि होती है। जो आदरपूर्वक विल्वमूल में दीपक जलाता है, तथा उसकी शाखा को लेकर हाथ से उसके नवीन पत्ते ग्रहण कर विल्व की पूजा करता है। वह सब पापों से छूट जाता है, तथा जो विल्वमूल में किसी शिव-भक्त को भक्तिपूर्वक भोजन कराता है, उसे एक के भोजन का करोड़ गुना फल प्राप्त होता है। इस प्रकार का विल्व-पूजन प्रकृति और निवृति, दोनों धर्म वालों के लिए उतम है।