» मोक्ष
 
मोक्षhttp://www.bestastroguru.com/articles/1373111493images (14).jpg

इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति मुक्ति के लिएसंघर्षरत रहता है । भूख से मुक्ति के लिए वह भोजन का प्रबन्ध करता है । सर्दी-गर्मी से मुक्ति के लिए वह मकान , वस्त्र आदि का प्रबन्ध करता है ; तनाव से मुक्ति के लिए मनोरंजन के साधनों को खोजता है ; रोग से मुक्ति के लिए औषधियों और शल्य-चिकित्सा का सहारा लेता है ; अज्ञान से मुक्ति के लिए शिक्षा ग्रहण करता है , असुरक्षा से मुक्ति के लिए राजनीतिक व्यवस्था तथा निर्धनता से मुक्ति के लिए अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है । फिर भी उसका मन अनन्त इच्छाओं का जाल फैलाता है और उनसे उनकी पूर्ति न हो पाने पर दु:ख का अनुभव करता है । यही मन प्रिय जनों में राग उत्पन्न करता है और उनसे वियोग होने पर शोकाकुल हो जाता है । यहमन भविष्य की चिन्ताओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर वर्तमान के सुख को छीन लेता है । प्राणों कामोह मन में मृत्यु-भय उत्पन्न करता है । उन सबसे मुक्ति भौतिक पदार्थों या भौतिक सुख-सुविधा के साधनों से नहीं मिल सकती । अध्यात्म के माध्यम से ही दु:ख , शोक और मृत्यु-भय से मुक्ति मिल सकती है जिसे मोक्ष कहते हैं । मोक्ष का पहला मूलमंत्र है इच्छाओं की पूर्ति से परितृप्त होकर भौतिक सुखों के लिए इच्छाओं की निस्सारता को समझ कर इच्छाओं का त्याग करना-
यदा सर्वे प्रमुच्यन्ते कामाये स्य हृदिश्रिता: ।
अथ मर्त्यो मृतो भवत्यत्र ब्रह्म समश्नुते ।
( जब हृदय की समस्त इच्छाएँ समाप्त हो जाती हैं तब मर्त्य अमर हो जाता है और इस जीवन में ब्रह्म की प्राप्ति कर लेता है।)
यदा सर्वे प्रभिद्यन्ते हृदयस्येह ग्रन्थय: ।
अथ मर्त्यो मृतो भवत्येतावद्धरनुशासनम् ।
( जब हृदय की समस्त सांसारिक ग्रन्थियाँ अलग हो जाती हैं तो मर्त्य अमर हो जाता है । यहीं समस्त शिक्षा का अन्त होता है।)