» सदैव विश्राम
 

 

भगवान शिव जी से जब पूछा गया कि आप हमेशा विश्राम में कैसे रहते है जबकि आपके कंठ में तो विष है !
 तब महादेव जी ने बड़ा ही सुन्दर उत्तर दिया -मेरे कंठ में तो विष है लेकिन ह्रदय में राम है इसलिये मुझे सदा ही विश्राम है !
 भावार्थ यह है कि यदि कठिन से कठिनतम समय में भी राम का नाम लिया जाये तो व्यक्ति चिंता-मुक्त हो जाता है और सदैव विश्राम पाता है !