» भावानुसार ग्रह फल
 

 

यदि सूर्य, मंगल, शनि सभी एक साथ या इनमें से कोई भी एक लग्न में हों, तो जातक ज्वर, उदर-विकार आदि बिमारियों से पीड़ित रहता है |
 
यदि पाप युक्त चन्द्रमा लग्न में हो, तो ज्वर से चिन्तित रहता है |
 
यदि ब्रहस्पति, बुध या शुक्र लग्न में हों, तो उस वक्त जातक को नौकरी में तरक्की मिलती है |
 
बुध अकेला शुभ होकर लग्न में हो, तो परिवार में सुखद समाचार सुनाई पड़ता है |
 
दुसरे स्थान पर चन्द्र, बुध, गुरु या शुक्र हो, तो कई तरीकों से अर्थ-संचय होता है |
 
यदि दुसरे स्थान में नीच का शनि हो, तो धन-हानि की सम्भावनाएं बना देता है |
 
दुसरे भाव में शनि हो, तो सोचा हुआ प्रत्येक कार्य अधुरा रहकर जातक को तकलीफ पहुंचाता है |
 
तीसरे स्थान में पड़े हुए पापग्रह धन-प्राप्ति का योग बनाते हैं और यदि वे ग्रह बलयुक्त हों, तो जमीन में गड़ा धन मिलता है |
 
तीसरे स्थान में पड़े हुए शुभग्रह कार्यसिद्धि में पूर्ण रूप से सहायक होते हैं |
 
चौथे स्थान का चन्द्रमा मन को प्रसन्न रखता है, परंन्तु यदि वह पापयुक्त हो, तो जुए में धन-नाश हो जाता है |
 
पंचम स्थान में स्थित शुभग्रह या पूर्ण चन्द्र धन और सुख को बढ़ाते हैं | यदि पंचम स्थान में पापग्रह हो, तो सन्तान को विशेष कष्ट रहता है |
 
छठे भाव में पापग्रह पड़े हों, तो वे शुभ माने जाते हैं | मंगल हो, तो वह शत्रुओं का नाश करता है, मुकदमे में विजय दिलाता है | सूर्य हो, तो ननिहाल से आर्थिक लाभ होता है | 
 
सप्तम भाव में पापयुक्त चन्द्रमा रोग तथा राज्य-भय को बढ़ाते हैं | पापग्रह हो, तो जातक की स्त्री कष्ट पाती है | क्षीण चन्द्र स्त्री को उदर-सम्बन्धी विकार उत्पन्न करता है, परन्तु यदि इस स्थान में शुभग्रह हो, या सप्तम भाव शुभग्रहों से दृष्ट हो, तो धन-लाभ, सुख-लाभ तथा यस प्राप्ति होती है | 
 
यदि आठवें स्थान में पापयुक्त चन्द्रमा हो, तो जातक मृत्युतुल्य कष्ट भोगता है | शुभग्रह भी इस स्थान पर हों, तो धननाश और मान-हानि होती है | 
 
यदि नवम भाव में पापग्रह हो, तो भईयों को कष्ट भोगना पड़ता है तथा जातक को पशुओं से हानि उठानी पडती है |
 
नवम भावस्थित शुभग्रह अन्न एवं धन की वृद्धि करते है | 
 
यदि दशम भाव में सूर्य हो, तो जातक को व्यवसाय से विशेष लाभ मिलता है | यदि इस स्थन पर शुभग्रह पड़े हों, तो जातक नौकरी में उन्नति करता है तथा राज्य-सम्बन्धी लाभ प्राप्त करता है | 
 
ग्यारहवें भाव में सभी ग्रह यश वृद्धि करते हैं | मित्रों के द्वारा जातक के सभी सोचे हुए कार्य पूर्ण होते हैं तथा शरीर नीरोग, पुष्ट एवं स्वस्थ रहता है | 
 
बारहवें भाव में पापग्रह हो, तो व्यय की अनेक सम्मभावनाएं बन जाती हैं | यदि मंगल हो, तो जातक को झूठे मुकदमे में फंसकर संचित द्रव्य से हाथ धोना पड़ता है | 
 
बारहवें भाव में स्थित शनि शुभफल प्रदान करता है | 
 
यदि बारहवें भाव में शुक्र हो, तो जातक की विदेश-यात्रा का योग बनता है |