» आठ मंदिरों की तीर्थ यात्रा
 
आठ मंदिरों की तीर्थ यात्राhttp://www.bestastroguru.com/articles/1373026583astvinayak.jpg

गणपति के सभी आठ मंदिर उनके विभिन्न रूपों, बाधाओं को दूर करने वाले से लेकर उन्नति और विद्या प्राप्ति के मार्गप्रदर्शक रूप तक का वर्णन करते हैं। प्रत्येक मंदिर अलग है, जबकि प्रत्येक मंदिर में अलौकिक समानता है।

इन गणपतियों की स्थिति और सूंड एक दूसरे से अलग है। उदाहरण के लिए, सभी मंदिरों में गणपति को इस प्रकार दर्शाया गया है कि उनकी सूंड उनके बाईं ओर गिरती है परंतु सिद्धटेक का सिद्धिविनायक मंदिर ही ऐसा मंदिर हैं जहाँ सूंड दाईं ओर गिरती है।

मयूरेश्वर का मंदिर मोरगाँव गाँव में है। इस मंदिर में 50 फीट ऊंचा गुंबद है जो प्रत्येक कोने पर एक स्तंभ ऐसे चार स्तंभों पर खड़ा किया गया है। इसके पास ही एक विशाल दीपमाला है – पत्थर से बनाया गया तेल के दीयों का स्तंभ।

सिद्धिविनायक मंदिर सिद्धटेक में है। यहाँ प्रदक्षिणा करना बहुत महत्वपूर्ण मना जाता है क्योंकि मंदिर एक पहाड़ी पर है और संपूर्ण प्रदक्षिणा लगभग 5 किमी की होती है।पाली गाँव बल्लालेश्वर मंदिर का घर है। आठ गणपति मंदिरों में से केवल यही एक मंदिर है जिसका नाम एक भक्त के नाम पर रखा गया है जो ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुआ था।

गिरिजात्मक का मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर गुफाओं में स्थित है। ऊपर तक पहुँचने के लिए लगभग 300 सीढ़ियाँ चढनी पड़ती हैं हालांकि यहाँ से दृश्य बहुत सुंदर दिखता है। थेऊर का चिंतामणि मंदिर वह स्थान है जहाँ गणपति ने चिंतामणि का रूप लेकर ब्राह्मण की सहायता कर उसकी चिंताए दूर की थी।ओझर का विघ्नेश्वर मंदिर अपनी तरह का एक ऐसा मंदिर है जहाँ सुंदर गुंबद है और शिखर सोने से बना हुआ है।

महागणपति का मंदिर पूर्वमुखी है और एक विशाल प्रवेश द्वार से सज्जित है। जय और विजय दो द्वारपाल हैं जिनकी मूर्तियाँ द्वार पर देखी जा सकती हैं। यह रांजणगाँव में स्थित है।अंत में वरद विनायक मंदिर महड में स्थित है। इस स्थान की मूर्ती एक झील के किनारे मिली थी और बाद में इसे एक मंदिर के अंदर रखा गया। वरद विनायक का आज जो मंदिर हम देखते हैं वास्तव में वह पेशवा शासकों द्वारा पुनर्निर्मित और पुनर्गठित किया गया है।