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प्राचीन भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी

 

प्राचीन भारत में ज्योतिष शास्त्र का प्रारंभ लगभग 10000 वर्ष ईशा पूर्व वैदिक युग से शुरू हुआ जिसमे वेद के छः अंगों मे ज्योतिष एक मुख्य अंग माना गया , वेदों की रचना के समय से चारों वेदों में ग्रहों के परिभ्रमण, पथ नक्षत्र, मौसम, आयन, युग ,दिन ,मास, अधिक एवं क्षय तिथि, ग्रहण, उल्का , धूमकेतु का उल्लेख मिलता है ॠगवेद मे ग्रहों और उनके कारकत्व का उल्लेख है ,यजुर्वेद मे 27 नक्षत्रो का उल्लेख किया गया है।

● विधिवत ज्योतिष शास्त्र का प्रारंभ महान ज्योतिर्विद एवं खगोलशास्त्रियों ने 18 सिद्धातो की रचना की जिनके नाम सूर्य, पितामह, व्यास ,वशिष्ठ, अत्रि, पराशर, कश्यप, नारद, गर्ग, मरीच ,मनु ,अंगिरा, लोमश, पौलिश, च्यवन, यवन, भृगु, शौनक थे इनमें से कुछ विद्वानों ने केवल संहिता लिखीं कुछ ने सिद्धांत , तथा कुछ ने दोनों की रचना की ।

● महर्षि पराशर ज्योतिष शास्त्र के पुरोधा ॠषि माने जाते हैं इनकी महान कृति " बृहत् पराशर होरा शास्त्र " वर्तमान समय में भी ज्योतिष प्रेमियों की प्रेरणा स्रोत है।

● महान ज्योतिर्विद वाराहमिहिर ने महत्वपूर्ण कृति पंचसिद्धान्तिका मे पांच सिद्धांतों पर विचार किया पितामह सिद्धांत, वशिष्ठ सिद्धांत, रोमक सिद्धांत ,पौलिश सिद्धांत ,सूर्य सिद्धांत प्रमुख है ।

उन्होंने बृहत् जातक ग्रन्थ की रचना की जो कि वर्तमान युग में भी एक महान ज्योतिषीय ग्रन्थ माना जाता है साथ ही सिद्धांत ,संहिता, होरा के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया।

● आर्यभट्ट प्रथम (476 ईशा पूर्व) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक आर्यभट्टीय मे कहा था कि पृथ्वी सूर्य के चोरों ओर परिक्रमा करती है ।( जबकि अनुसंधान का श्रेय 1543 ई॰ मे कोपरनिकस को मानते है जो कि पूर्ण सत्य नहीं है)

आर्यभट्ट द्वितीय ने महाआर्यभट्टीय ग्रन्थ का प्रतिपादन किया जो कि ज्योतिष शास्त्र का श्रेष्ठ कृति है।

● कल्यान वर्मा (578 ई ॰ ) ने ज्योतिष शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रन्थ सारावली की रचना की जो महर्षि पराशर के बृहत् पराशर होरा शास्त्र पर आधारित है।

● ब्रह्म गुप्त( 598 ई ॰ ) महान अन्वेषक ज्योतिषी एवं खगोलशास्त्रि थे उन्होंने ब्रह्म गुप्त सिद्धांत ग्रन्थ का प्रतिपादन किया।

● पृथ्युशस वाराहमिहिर के यशस्वी पुत्र थे जिन्होंने अपनी महान कृति ' षटपंचासिका ' की रचना की जिसमें प्रश्न शास्त्र के 56 श्लोकों का बहुत ही सुन्दर एवं सटीक वर्णन किया है।

● भट्टोतपल( 888 ई ॰) प्रसिद्ध ज्योतिषी हुए जिन्होंने वाराहमिहिर एवं ब्रह्मगुप्त के द्वारा संचित शास्त्रों पर व्याख्याएं की जिसके कारण वाराहमिहिर को यथायोग्य लोकप्रियता मिली ।

● श्रीपति( 999 ई॰ ) एक महान खगोलशास्त्री गणितज्ञ एवं ज्योतिषी थे इनकी प्रसिद्ध कृति सिद्धांत शेखर है इन्होने ज्योतिष की कृति श्रीपति पद्धति, रत्नासार , रत्नमाला ,रत्नावली के नाम से विख्यात है।

● भास्कराचार्य (1114 ई ॰) इनकी सबसे महत्वपूर्ण कृति सिद्धांत शिरोमणि, करन कौतूहल और सर्वतोभद्र है जो ज्योतिष शास्त्र के अद्भुत ग्रन्थ है ।

● यवनाचार्य ताजिक शास्त्र के महारथियों मे से महान विद्धान माने जाते हैं इन्होने अरबी भाषा मे इत्थसाल , इशराफ , इंदुवार इत्यादि ताजिक योगो को प्रचलित किया।

● तेजसिह(1300 ई॰ ) वर्षफल के आविष्कारक महान ज्योतिर्विद जिन्होने ताजिक शब्द का प्रचलन उनके नाम से प्रारंभ हुआ।

● दुर्ग देव ( 1089 ई ॰) जिन्होंने प्रश्न कुंडली पर कार्य किया तथा अर्धकांड और ॠषि सामुचय नामक ग्रंथो की रचना की इनमे निमित्त एवं शकुन के बारे मे बताया गया है।

● पद्मप्रभ सूरी( 1294 ई॰ ) जिन्होंने भुवनदीपक नामक ग्रंथ की रचना की जिसमें 170 श्लोक हैं।

● केशवचार्य ( 1498 ई ॰ )ज्योतिषीय ग्रन्थ मुहूर्त तत्व की रचना की जो मुहूर्त निर्धारण का उल्लेख ग्रन्थ है।

● नारायण (1491 ई॰ ) मुहूर्त ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रन्थ मुहूर्त मार्तण्ड की रचना की।

● विट्ठल दिक्षित ( 1627 ई॰ ) जिन्होने ज्योतिषीय ग्रन्थ मुहूर्त कल्पद्रुम की रचना की थी ।

● अनिल पट्टन ( 1175 ई ॰ ) जिन्होने नरपति जयचर्या नामक ग्रंथ की रचना की।

● केशव ( 1456 ई॰ ) महान ज्योतिर्विद थे जिन्होंने ज्योतिष से सम्बंधित खगोल शास्त्र की कई पुस्तकें लिखी जिनमें ग्रह कौतुक, वर्ष ग्रह सिद्धि , जातक पद्धति, तिथि सिद्धि ,ताजिक पद्धति, गणित दीपिका आदि प्रमुख हैं।

● गनेश दैवज्ञ ( 1517 ई ॰ ) जिन्होने ग्रह लाघव, लघु तिथि चिन्तामणि, वृहत तिथि चिन्तामणि, सिद्धांत शिरोमणि आदि महत्वपूर्ण ग्रन्थो की रचना की।

● धुंनडीराज ( 1541 ई॰ ) जिन्होने सिद्धांत सुन्दर एवं जातक वर्णन ग्रन्थ की रचना की जिसमें 2000 श्लोक हैं।

● नीलकंठ ( 1566 ई॰ ) जिन्होने प्रसिद्ध पुस्तक ताजिक नीलकंठी की रचना की जो कि अपने तीन भागों संघतन्त्र ,वर्ष तन्त्र, प्रश्न तन्त्र से प्रसिद्ध है

● राम दैवज्ञ ( 1575 ई ॰ ) जिन्होने प्रसिद्ध पुस्तक मुहूर्तचिन्तामणि की रचना की जिसमें मुहूर्त पर उत्कृष्ट व्याख्या है ।

● रंगनाथ ( 1575 ई ॰ ) जिन्होने सूर्य सिद्धांत के आधार पर ' गुरार्थ प्रकाशिका ' टीका की रचना की ।

● मुनीश्वर (1603 ई॰ ) जिन्होने " सिद्धांत सर्व भौम " की रचना की तथा भास्कराचार्य की सिद्धांत शिरोमणि और लीलावती पर टीका लिखा।

● दिवाकर- (1606 ई ॰ ) जिन्होने 19 वर्ष की आयु में " जातक पद्धति " ज्योतिषीय ग्रन्थ की रचना की।

● कमलाकर भट्ट एक महान खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ थे जिन्होंने सिद्धांत तत्व विवेक नामक पुस्तक की रचना की जो कि सूर्य सिद्धांत पर आधारित है।

● महामहोपाध्याय पं बापूदेव शास्त्री - महान विद्धान प्रसिद्ध ज्योतिर्विद थे ज्योतिष शास्त्र की संस्कृत एवं हिन्दी दोनों ही भाषाओं ग्रन्थों की रचना की उनके प्रसिद्ध ग्रन्थ निम्नवत है-

सूर्य सिद्धान्त सोपपत्तिक ,फलितविचार, सायनवाद, मानमंदिरवर्णनम ,प्राचीन ज्योतिषाचार्याशयवर्णनम , तत्वविवेकपरीक्षा ,विचित्रप्रश्नसंग्रहः ,सोत्तर , नूतनपंचाग- निर्माणम ,पंचागोपपादनम ,चलगणितम ,खगोलसार आदि प्रमुख हैं

● महत्वपूर्ण ज्योतिष शास्त्र के ज्ञाता लल्लाचार्य का शिष्यधीवृद्धिदतन्त्र ग्रन्थ अत्यंत प्रसिद्ध है ।

● श्रीधराचार्य ज्योतिषविद् द्वारा जातक पद्धति, रत्नमाला, त्रिशतिका ग्रन्थों की रचना की।

● वित्तेश्वर (वटेश्वर ) ज्योतिषाचार्य ने करणसार नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना की।

● मुंजाल ने लघुमानस के रचनाकार के रूप में ज्योतिष- जगत मे महान आदर है ।

● श्रीधर ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ विद्धान थे जिन्होंने गणितसार एवं ज्योतिर्ज्ञाननिधि संस्कृत में तथा कन्नड भाषा मे जातकतिलक नामक ग्रंथ की रचना की।

● भोजराज (भोजदेव ) - ये धारानगरी के राजा थे जिन्होंने राजमृगांक, राज मार्तण्ड, आदित्यप्रताप, विद्वज्जनवल्लभ ,रमलरत्न आदि अनेक ग्रन्थों की रचना की।

● दशबल इनका करणकमल मार्तण्ड नामक ग्रंथ ज्योतिष शास्त्र की अनूठी कृति है।

● ब्रह्मदेव जिन्होंने करणप्रकाश नामक ज्योतिषीय ग्रन्थ प्रसिद्ध है।

● शतानन्द इन्होने भास्वतीकरण नामक ग्रंथ की रचनाकार प्रसिद्ध विद्धान थे ।

● सोमेश्वर इनका मानसोल्लास ( अभिलषितार्थ चिन्तामणि ) ग्रन्थ अति प्रसिद्ध है।

● बल्लालसेन ज्योतिषविद् की कृति अद्भुतसागर बहुत प्रसिद्ध है ये लक्ष्मणसेन के पुत्र थे।

● नरपति दैवज्ञ द्वारा रचित नरपतिजयचर्या ग्रन्थ अति प्रसिद्ध है यह संहिता के अन्तर्गत मुख्य रूप से शकुन शास्त्र का ग्रंथ है ।

● कालिदास दैवज्ञ इनका ज्योतिर्विदाभरण नामक प्रसिद्ध मुहूर्त ग्रन्थ है ।

● केशवार्क इनका विवाह वृन्दावन नामक मुहूर्तग्रन्थ अति प्रसिद्ध है।

● महादेव इन्होने ग्रहसिद्धि नामक प्रसिद्ध करण ग्रंथ है

● महेन्द्र सूरि जिन्होने यन्त्रराज नामक करण ग्रंथ की रचना की।

● दामोदर - पद्मनाभ के पुत्र थे भटतुल्य नामक करण ग्रंथ की रचना की।

● वैद्यनाथ इनका जातकपारिजात नामक होरा शास्त्र का फलित ग्रन्थ अति प्रसिद्ध है।

● गंगाधर इन्होने सूर्य सिद्धांत के अनुसार चान्द्रमानाभिधानतन्त्र नामक ग्रंथ की रचना की इस ग्रन्थ मे चन्द्र मास के अनुसार ग्रहों की गति देखकर ग्रह स्पष्ट करने की रीति बतायी गयी है।

● मकरन्द ने सूर्य सिद्धांत के आधार पर तिथि आदि के साधन तथा पंचांग- साधन के लिए मकरन्द नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना की।

● ज्ञानराज इनके सिद्धांतसुन्दर नामक गणित ग्रन्थ तथा ज्ञानराजजातक नामक होरा शास्त्र ग्रन्थ बड़े ही प्रसिद्ध है।

● पीतांबर इनका विवाहपटल नामक ग्रंथ अति प्रसिद्ध है जिसमें विवाह संमबन्धित सभी विषयों का वर्णन किया है।

● हरि भट्ट जिन्होने ताजकसार नामक होरा शास्त्र के ग्रन्थ की रचना की।

● शिवदास इनका ज्योतिर्निबन्ध ग्रन्थ अति प्रसिद्ध है यह ग्रन्थ धर्म शास्त्रीय विषयों का तथा संस्कार आदि के मुहूर्त का निरूपण करता है।

● अनन्त दैवज्ञ महान ज्योतिर्विद नीलकंठ एवं रामदैवज्ञ के पिता जिन्होने जातक पद्धति, तथा कामधेनुगणितटीका प्रसिद्ध ग्रन्थो की रचना की।

● नृसिंहाचार्य इन्होने मध्यमग्रहसिद्धि नामक ग्रंथ का प्रतिपादन किया।

● दिनकर कृति बृहत्खेटक सिद्धि ,लघु खेटक सिद्धि

● विष्णु कृति ग्रह चिन्तामणि की सुबोधनी

● महामहोपाध्याय पं श्री सुधाकर द्विवेदी सिद्धांतज्योतिष के ज्ञाता प्रसिद्ध ज्योतिषी थे उन्होने ज्योतिष शास्त्र के लुप्त प्राय प्राचीन ग्रंथों को प्रकाश मे लाने तथा अपनी व्याख्या भाष्य के द्वारा सुबोध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनके द्वारा रचित प्रमुख दीघ्रवृत्तलक्षणम ,भूभ्रमरेखा निरूपणम ,ग्रहणे छादकनिर्णयः ,प्रतिभाबोधकः ,पिण्डप्रभाकरः आदि प्रमुख हैं।

मल्लारि, विश्वनाथ, रंगनाथ, बलभद्र, रत्नकंठ, रघुनाथ, गोविन्द, गणपति, चिन्तामणि दीक्षित , जटाधर, माधव, नारायण भट्ट, परमानंद, जगन्नाथ, जयसिंह, बबुआ ज्योतिषी, मणिराम, मथुरानाथ , राघव, यज्ञेश्वर , महिमोदया, रामयत्न ओझा, मानसागर, नन्दलाल , बाल गंगाधर तिलक, रघुनाथ आचार्य प्रमुख ज्योतिष विद्वानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।