|| Maa Bagalamukhi Aarti 2 ||
 

 

जय पीताम्बरधाारिणी जय सुखदेवरदे, मातर्जय सुखदेवरदे।
भक्त-जनानांक्लेशं, भक्त-जनानांक्लेशं, सततंदू  र करे।
।जय देवि, जय देवि।
।असुरैः पीड़ि त दे वास्तव शरणंप्राप्ता, मातस्तव शरणंप्राप्ताः।।ध्ृ ात्वा कौर्मशरीरं, धृत्वा कौर्म शरीरं, दू  री कृत दुखं।।।जय देवि, जय देवि।
।मुुनिजन वन्दित चरणेजय विमलेबगले, मातर्जय विमलेबगले। ससं ारार्णव भीतिं, सं सारार्ण व भीतिं, नित्य शान्तकरे।।जय देवि, जय देवि।
।नारद-सनक-मु नीन्द्रै-ध्र्यातं, पदकमलं, मातध्र्यातंपदकमलम्।।हरिहर-द्रुहिण-सुरेन्द्रै, हरिहर-द्रुहिण-सुरेन्द्रै, सेवित पदयुगलम्।।।जय देवि, जय देवि।
।कांचनपीठ-निविष्ठेमु द्गर-पाश-युते, मातर्मुद्गर पाशयुतेर्।जिह्वा-वज्रसुशोभित, जिह्वा-वज्र सुशोभित, पीतांशुक-लसिते।।जय देवि, जय देवि।
।बिंदु त्रिकोण-षड़ स्त्रै-अष्टदलोपरिते, मातष्र्ट-दलोपरिते।षोडशदलगल-पीठं, भूपुर-वृत्त-युतं।जय देवि, जय देवि।
।इत्थंसाधक-वृन्दैश्चिन्तयतेरूपं, मातश्चिन्तयतेरूपं।।शत्रु विनाशक बीजं, शत्रु विनाशक बीजं, धृत्वा हृत्कमले।।शत्रु विनाशक बीजं, शत्रु विनाशक बीजं, धृत्वा हृत्कमले।।जय देवि, जय देवि।
।अणिमादिक बहुसिद्धिं
लभतेसौख्ययुतां, मातर्लभतेसौख्ययु  तां।भोगान भुक्त्वा सर्वान, भोगान भुक्त्वा सर्वान, गच्छति विष्णु पदम्।।जय देवि, जय देवि।
।पू जाकालेको-अपि आर्तिक्यंपठते, मातरार्तिक्यंपठते।धनधान्यादि-समृद्धो, धनधान्यादि-समृद्धो, सानिध्यंलभते।।जय देवि, जय देवि।